सूरज अपनी जगह से अचानक गायब हो जाये तो ?

सूर्य हमारे धरती को प्रकाश और ऊर्जा देने का एकमात्र प्राकृतिक साधन है, सूर्य के ऊर्जा और प्रकाश के बिना धरती पर जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती। लेकिन क्या होगा अगर  सूरज अपनी जगह से अचानक गायब हो जाये तो ? 

अब अगर इस केस में सूर्य अचानक से गायब हो जाये तो करीब 500 सेकण्ड तक कुछ नहीं होगा क्योकि सूर्य की किरणों को धरती तक आने के लिए करीब 8.30 मिनट लगते है और इसके बाद पृथ्वी पर अनंतकाल के लिए अँधेरा पसर जायेगा ।

For more info. Click this link--
https://youtu.be/YgNn-XTks3k

सूर्य के चले जाने के बाद चाँद भी अंधकारमय हो जायेगा क्योकि हम जानते है कि चाँद सूर्य की किरणों से ही प्रकाशमान होता है ।
सूर्य के जाने के बाद सूर्य का पृथ्वी से ग्रेविटेशनल फाॅर्स ख़त्म हो जायेगा, इसका मतलब पृथ्वी अब सौरमंडल के चक्कर न लगाकर 3 km/sec की रफ़्तार से स्पेस में एक अंतहीन सफर पर निकल पड़ेगी ।
हालांकि तब तक किसी को इसके बारे में कुछ पता नहीं चलेगा और लोग रात के गुजरने का इंतज़ार करेंगे, लेकिन उन्हें शायद अब यह नहीं पता होगा कि अब इस भयावह रात का अंत अब कभी नहीं होने वाला। हालांकि मुमकिन है कि तब तक वैज्ञानिको को इस पुरे माजरे की भलीभांति समझ हो जाएगी और वो पृथ्वी पर जीवन के अस्तित्व को बचने के हर संभव प्रयास में लग जायेंगे।


सूर्य के जाने के बाद हम कोयले, पेट्रोलियम,नुक्लिअर ईंधन और बिजली के ख़त्म होने तक अपने शहरो को पहले की भांति रौशन रख पाएंगे, लेकिन यह ज़्यादा दिनों तक मुमकिन नहीं हो पायेगा। अब इंसानो के पास सबसे बड़ी समस्या होगी भोजन की व्यवस्था, लेकिंन पौधों द्वारा भोजन बनाने की प्रक्रिया रुक जाएगी क्योंकि सूर्य की रोशनी के बिना पौधे प्रकाश शंश्लेषण की प्रक्रिया को पूरा नहीं कर पाएंगे,

पृथ्वी पर भोजन की कमी की वजह से लूटपाट, मारकाट जैसी कई crimes बढ़ने लगेगी क्योकि भूखे पेट किसी भी देश की सेना अपने नागरिको की रुरक्षा करने में समर्थ नहीं होगी।

सूर्य के बिना हमारी धरती का तापमान गिरने लगेगा, शुरुवाती दौर में पृथ्वी का तापमान -20 डिग्री तह रहेगा लेकिन दो महीने के बाद पृथ्वी का औसत तापमान -100 डिग्री तक गिर जायेगा, और इस तरह से समुन्द्र और नदियाँ समेत पूरा का पूरा पृथ्वी ग्रह जमने लगेगा।

इस कम तापमान में वायुमंडल का संतुलन बिगड़ जायेगा और पूरी पृथ्वी बर्फ की तरह सफ़ेद होने लगेगी। धीरे धीरे पृथ्वी का तापमान -240 डिग्री तक गिर जायेगा, अब इस परिस्थिति में जिन्दा रहने के लिये इंसानो को पृथ्वी के भूतापीय ऊर्जा का सहारा लेना होगा जिसके लिए पृथ्वी के केंद्र तक जाने की आवश्यकता होगी।


सूर्य के जाने के 20 से 30 सालो में हमारा ग्रह इतना ठंडा हो जायेगा कि हवाये बर्फ के रूप में चलने लगेगी और साथ ही साथ अंतरिक्ष (Space) से घातक रेडियो एक्टिव (Radio Active) किरणे भी पृथ्वी पर आने लगेगी। DNA को डैमेज कर देने वाली इन खतरनाक किरणों से लम्बे समय तक खुद को बचा पाना इंसानो के लिए शायद मुमकिन नहीं होगा।

इस विषम परिस्थिति और भोजन की कमी के चलते बचे खुचे इंसानो के पास स्पेसशिप में बैठकर किसी दूसरे अनुकूल ग्रह पर जाने के सिवाय जीवन को सुरक्षित रख पाने का कोई दूसरा तरीका नहीं होगा।

इंसानो के पलायन के बाद, पृथ्वी सिर्फ एक बर्फ़ीली ग्रह रह एक ऐसी धरती जिसपर एक सभ्य और सांस्कृतिक मानव सभ्यता का विकास हुआ था.

पृथ्वी पर जीवन पूरी तरह से नष्ट नहीं होगा, क्योंकि समुन्द्र के तल में पाए जाने वाले सूक्ष्म जीव यानि की माइक्रोऑर्गेनिस्म (microorganism), सूर्य के किरणों के बजाय पृथ्वी के केंद्र से आने वाली ऊर्जा से अपना भोजन बनाते है। इस तरह से सूर्य के गायब होने के अरबो सालो बाद भी इन समुंद्री जीवों की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

अपने इस सफर में पृथ्वी न जाने कितने तारो और ग्रहो के करीब से गुजरेगी, और क्या पता शायद पृथ्वी एक दिन किसी ऊर्जावान सितारे के गुरुत्वाकर्षण में आकर उसके चक्कर काटने लगे। और उस सितारे की गर्मी से महासागरों की बर्फ पिघलनी शुरू हो, हवाएं बर्फ़ीली न होकर सामान्य चलने लगे और बर्फ़ की चादर से ढकी इस पृथ्वी पर जीने की अनुकूल परिस्थितिया बन जाये। फिर समुंद्री जीव पृथ्वी पर आकर Evolution की प्रक्रिया को प्रारंभ कर दे, और फिर सैकड़ो सालो के निरंतर विकास के बाद मानव फिर से पृथ्वी पर अपने कदमो के निशान बना पाये।

Comments

Popular posts from this blog

PLAYSTATION क्या होता है?

Coronaviruus क्या है?✳️

DOWNLOAD AND CRACK FILMORA